एक वो हसीन दौर था........एक ये भी अजीब दौर है,
तब यार थे और महफ़िल जम जाती थी...
अब महफ़िल है पर वो यार नहीं मिलते !!
तब एक फूल भी खिलता था तो.... मन उमंगो में डूब जाता था
अब वादियाँ देख .... भी सब सूना सूना सा लगता है........
तब ख़ुद को मुसुकारने से रोकते थे....कहीं नज़र न लग जाए,
अब कोशिश करती है ये दुनिया हमको हँसाने की.....
तब अपने हमेशा दिल के करीब थे.... और गैर भी अपने से लगते थे,
अब गैरों का क्या कहें.....अपने भी पराये - पराये से लगते हैं....
तब दौलत ना सही-शोहरत ना सही ....फ़िर भी दुनिया में सबसे अमीर थे,
अब दौलत भी है-शोहरत भी है ....पर फ़िर भी दुनिया में सबसे गरीब हैं....
कल दुनिया में सावन की बहारें थी....खुशबू थी-ताजगी थी,
आज बदला बदला सा लगता है...शायद ये मौसम भी कोई और है.....
एक वो हसीन दौर था........ एक ये भी अजीब दौर है,
कल मैं कोई और था....आज शायद मुझमे कोई और है !!
Monday, September 28, 2009
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1 comment:
कल दुनिया में सावन की बहारें थी....खुशबू थी-ताजगी थी,
आज बदला बदला सा लगता है...शायद ये मौसम भी कोई और है.....
sab samay ka chakra hai ........bahut hi sundara rachana.....ye panktiyaa dil ko chhoo gayi........atisundar
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