जिंदगी भी अजीब रंग दिखाती है....हर पल एक नया करवट ले जाती है,
कभी आसुओं से दामन भिगाती है, तो कभी खिल खिलाते फूलों सा मुस्कुराती है,
समझाऊ भी तो समझाऊ कैसे इसको, इसकी अदाएं भी अजब निराली हैं,
कभी माँ की ममता का आँचल हैं, तो कभी पापा का गुस्सा और गाली हैं,
कभी बहनों के संग बिन बात का झगडा, तो कभी भाइया की ताकत से डरवाती है,
कभी बरसों के बिछडे हुए यारो से मिलवाती है ...तो कभी अपनों से दूर करवाती है.....
मिल जाए गर साथ किसी को, बस वोही एक किस्मत वाला होता है,
दिन में दोस्तों के साथ मस्तियाँ, रातों को जुल्फों के तले सपने पिरोता है,
मिल जाती है हर मंजिल उसको, जिसको भी ये अपने रंगों से भिगोती है,
इसके साथ हर दिन ईद -मुहर्रम , और हर रात दीप-दिवाली होती है!
कोशिश कर ली ना जाने कितनी, इसको बहलाने की - फुसलाने की....
कब मानी है ये मानाने से, आदत है इसकी इसकी वही पुरानी..हमको यूँही सताने की,
जिद्दी है-अपनी धुन की, अपने मन का करती है - करवाती है,
जिन्दा-दिल है आदत इसकी, तभी तो यारो ये "जिंदगी" कहलाती है....
Tuesday, September 8, 2009
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