दोस्त चाहत हर किसी की यहाँ मुक़म्मल नही होती ,
दिल तनहा ना होता ....ये आँखें हमको यूँही नही भिगोती,
ये तो दीवाना दिल है जिसे हर पल ....इन परियों की जुस्तुजू है....
अगर ये जुस्तुजू ही ना होती ....तो सच कहूँ....ये परियां ...फ़िर "परियां" ना होती !!!!
Thursday, November 5, 2009
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