वो लूट गए अपनी यादों का हर निशाँ, फकत एक सहारा था जीने के वास्ते,
जिनकी खातिर अपनी राहें बदली, वो छोड़ गए हमें तनहा एक अनजान रास्ते,
कर भरोसा चल दिए थे....राहे जिंदगी की डगर जहाँ रूहें जिस्म से जुदा.... एक हो,
फिर वही सिला मुहब्बत का..टूटा एक और ख़्वाब..अब हम हैं और ये "तनहा सफ़र" !!
Wednesday, November 25, 2009
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