तेरी मुहब्बत ने मेरे प्यार को कुछ इस तरह संवारा है,
जहाँ देखो वहां....मेरी चाहत -तेरे हुस्न का ही नज़ारा है,
बदन पर यूँ पड़ी....एक नशा कर गयीं इस बार सावन की ये बूँदें,
कैसे कहूं ....प्यासी रूह ने कितने सावन इनको ....यूँही दूर से निहारा है.....!!!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment